मैं पेशे से एक फ़ोटोग्राफ़र हूँ, मुम्बई में रहता हूँ। मेरा अकसर शूटिंग केलिये बाहर जाना होता रहता है। ऐसे ही एक शूटिंग के लिये मैं एक बारगोवा गया था। मेरे लिये यह एक बहुत ही मजेदार अनुभव था। अपनीशूटिंग के बाद कुछ दिन के लिये मैं अकेला गोवा में रूक गया था। मैंनेरेलगाड़ी से आने का फ़ैसला किया। मैंने ए सी कम्पार्टमेंट में अपने लियेएक सीट रिजर्व कराया। यह गोवा का ऑफ़ सीजन था इसलिए रेलगाड़ीमें बिलकुल भी भीड़ नहीं थी। मुझे बहुत आसानी से रेलगाड़ी का टिकटमिल गया। शाम को 6 बजे मेरी रेलगाड़ी मडगाँव स्टेशन से छूटी। मेरेकम्पार्टमेंट में मुझे सिर्फ़ दो लोग दिखे लेकिन उनकी भी सीट डिब्बे केदूसरे कोने में थी। रेलगाड़ी वहाँ से चली और कुछ देर में ही कोई स्टेशनआया। जहाँ पर एक लड़की जो कि बहुत ही मॉर्डन कपड़ो में थी मेरेकम्पार्टमेंट में आई और मेरे भाग्य से उसकी सीट मेरे सीट की बगल मेंथी। उसने मेरे केबिन में प्रवेश किया। वह मुस्कराई और उसने अपनाहाथ आगे बढ़ा दिया।
हाय ! मैं आलीन !
मैं भी मुस्कराया मन ही मन मुझे खुशी हो रही थी चलो अब मेरा रास्ताकम बोरिंग होगा। हम दोनों का वार्तालाप शुरू हुआ। वह काफ़ी बोल्डकिस्म की लड़की थी। उसका सेक्सी फ़िगर मुझे उसकी तरफ़ लगातारआकर्षित कर रहा था। बातों बातों में हम एक दूसरे के बारे में काफ़ी कुछजान गये थे। वह मॉडलिंग के लिये मुम्बई आ रही थी। इसके पहलेउसने एक दो विज्ञापन में काम किया था। मेरे बारे में जानने के बादउसने मेरे में ज्यादा रुचि लेनी शुरु कर दी। मेरे केबिन की हलकी नीलीलाइट जल रही थी। उसने केबिन का पर्दा खींच लिया जिससे हमें बाहरसे कोई अवरोध न मिले। वह मेरे सीट पर बैठी थी हम दोनों कॉफ़ी पी रहेथे। हम दोनों की बातें और आगे बढ़ी और फिर फ़िल्म इण्डस्ट्री औरउसके आकर्षक लाइफ़ के बारे में होने लगी।
रात काफ़ी हो चुकी थी। हमारे डिब्बे में जो भी दो चार लोग थे अपनेकेबिन में सो चुके थे। क्योंकि कहीं से कोई आवाज नहीं आ रही थी। हमदोनों अभी भी अपनी बातों में मशगूल थे। वह मेरे से काफ़ी सटकर बैठीथी जिससे हम रेलगाड़ी के झटकों से कभी कभी हलके से छू जाते थे।अचानक मैंने उसके हाथ को अपने हाथ पर पाया। मैंने उसकी तरफ़ देखावह मुस्कराई, बस मुझे हरी झण्डी मिल गई।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और चूम लिया। उसके कंधों परअपना हाथ रखकर उसे अपनी ओर खींच लिया। वह आसानी से मेरेऊपर आ गिरी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये। उसके होंठबहुत ही मुलायम और गुदाज थे। उसकी सांसे काफ़ी गर्म थी। मैं उसकेनिचले होंठों को अपने दोनों होंठों के बीच रखकर उन्हें चूसने लगा। उसकेहाथो की उंगलियाँ मेरे बालों में उलझी हुई थी। उसने मेरी जीभ को अपनेमुँह में लिया और बहुत ही मजेदार ढंग से चूसने लगी। मेरा प्राइवेट अंगपैंट के भीतर उफ़ान मार रहा था।
मेरा हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुये उसकी कमर के नीचे तक पहुँचगया। मैंने अपना हाथ उसकी टाइट टी-शर्ट में डाल दिया। धीमे धीमे मेराहाथ उसकी दोनों गोलाइयों के नजदीक तक पहुँच गया। मेरे हाथ उसकीब्रा को महसूस करने लगे। मैं उसकी दोनों गोलाइयों को अपने हाथों मेंलेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे इतनी बड़ी थी कि मेरे हाथो में नहींआ रही थी। इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा। उसकीहरकतें मुझे बहुत ही ज्यादा उत्साहित कर रही थी।
अचानक मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी पैंट पर पड़ा था। मेराप्राइवेट अंग मेरे पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने को तैयार था। वह मेरे सख्तहो चुके अंग को मेरे पैंट के ऊपर से रगड़ रही थी। उसने मेरी पैंट की जिपखोल दी और अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया और मेरे लण्ड कोअण्डरवीअर के ऊपर से पकड़ लिया। मेरी हालत बहुत बुरी होरही
2 comments:
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